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शीतला सप्तमी पर भीलवाड़ा शहर में निकाली जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाकर मुर्दे की सवारी


शीतला सप्तमी पर भीलवाड़ा शहर में निकाली जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाकर मुर्दे की सवारी

भीलवाड़ा: भीलवाड़ा शहर में वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत लोगों के मनोरंजन के लिए शुक्रवार को शीतला सप्तमी के  दिन में जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाकर मुर्दे की सवारी निकाली गई इस दौरान लोग रंग गुलाल उड़ाते हुए हंसी मजाक में फब्तियां भी कस्ते नजर आए शव यात्रा के दौरान कोई अप्रिय घटना ना हो जिसके लिए शहर में पुलिस का जाब्ता भी तैनात किया गया।

भीलवाड़ा शहर में एक अनोखी परंपरा जिसका पिछले लगभग 125 साल से निर्वहन किया जा रहा है जिसमें जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाया जाता है और पूरे गाजे-बाजे के साथ रंग- गुलाल उड़ाते हुए पूरे भीलवाड़ा शहर में उसकी शव यात्रा निकाली गई उसके बाद भीलवाड़ा शहर में स्थित एक विशेष स्थान पर अंतिम संस्कार भी किया गया मगर इससे पहले अर्थी पर लेटा युवक कूद कर वहां से भाग जाता है।

वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में शीतला सप्तमी का त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है जहां शीतला सप्तमी के एक दिन पूर्व  गुरुवार को घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए गए वहीं आज शुक्रवार को भीलवाड़ा शहर सहित जिले में रंग गुलाल खेलते हुए घरों में बनाए गए व्यंजन का सेवन किया गया जहां भीलवाड़ा शहर में लगभग 125 साल से मुर्दे की सवारी निकालने की परंपरा है इस परंपरा का निर्वहन शुक्रवार को भी किया गया जहां भीलवाड़ा शहर के चित्तौड़ वालों की हवेली से एक जिंदा युवक को अर्थी पर लेटाकर शव यात्रा निकाली गई।शव यात्रा के दौरान आगे ढोल नगाड़े सहित हजारों लोग नाचते गाते हुए चलते हैं जहां शव यात्रा के दौरान अर्थी पर लेटे हुए जिंदा युवक कभी पानी पीता है और कभी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन भी करता नजर आया है मुर्दे की सवारी के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हो इसके लिए भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर भारी पुलिस का जाब्ता भी तैनात किया गया मुर्दे की सवारी का समापन पुराना भीलवाड़ा शहर में स्थित चारभुजा मंदिर के पीछे हुआ इस दौरान अर्थी से कूद कर युवक भाग गया वही केवल खाली अर्थी का अंतिम क्रिया संस्कार करने की परंपरा भी निभाई गई